भारतीय सेना में हर पांचवां जवान उत्तराखंड से है, तो उत्तराखंड के लिए ये बड़ी खबर है। सेना के अस्पतालों में अब पुराने आश्रित कार्ड मान्य नहीं होंगे। सभी कमांड को रक्षा मंत्रालय की ओर से इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। इस संख्या के डिपेंडेंट कार्ड्स दिखाने वाले आश्रित को सेना अस्पताल में अब नहीं मिल सकेगा। इस पत्र में एक बड़ी बात ये भी बताई गयी है कि जब सेना ने नए आश्रित कार्ड जारी किये तो बीच में कई पुराने कार्डों के फर्जी होने के बारे में भी सूचना सामने आई, शिकायत मिली कि इस नकली कार्डों का दुरपयोग अपात्र रिश्तेदार आर्मी हॉस्पिटल में कर रहे हैं। इसके अलावा जारी पत्र के द्वारा जवानों के माता-पिता के लिए न्यूनतम मासिक आय में भी परिवर्तन किया गया है, अब आश्रितों की 9000 रुपये महीना से अधिक आय नहीं होनी चाहिए। आयकर विभाग की ओर से जारी वार्षिक आय प्रमाणपत्र भी मान्य होगा। रक्षा मंत्रालय के इस पत्र में साफ़ कहा गया है कि सत्यापन के लिए आधार की एक प्रति के साथ मेडिकल एंटाइटेलमेंट सर्टिफिकेट (MEC) ले जाना आवश्यक होगा। हालांकि, शमशेर सिंह बिष्ट, जो पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष हैं, उन्होइने विरोध जताते हुए कहा कि मात्र 9000 रुपये मासिक आय करना जवानों के साथ अन्याय है। बड़ी संख्या में आश्रित माता-पिता इस नए नियम के बाद इलाज से वंचित रह जाएंगे।
