हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के रण में कांग्रेस ने युवा चेहरे वीरेंद्र रावत पर दांव खेला है। बेटे के चुनाव प्रचार के रथ के सारथी हरीश रावत ही बने हैं। यहां चुनावी परीक्षा बेशक वीरेंद्र की होगी, लेकिन रिपोर्ट कार्ड हरीश रावत का ही खुलेगा। उनका मानना है कि वीरेंद्र का प्रदर्शन हरिद्वार लोस में हरीश रावत के दमखम को भी तय करेगा। सांसद बनने के बाद से हरीश समर्थकों की यह धारणा भी रही कि हरिद्वार में उनके नेता की जड़ें गहराई पकड़ चुकी हैं। उन्होंने इस जीत को अपने नेता की हरिद्वार में मजबूत पकड़ के तौर पर देखा, मगर अब हरीश रावत के सामने बेटे को लोस चुनाव में जिताने की जिम्मेदारी है। हरीश भी सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं से मान रखने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने किसी भी पद पर रहते हुए कार्यकर्ताओं के लिए भी दरवाजे बंद नहीं किए और न ही निराश किया। हर बार चुनावी पिच में उतरने वाले हरीश रावत इस बार लोकसभा चुनाव मैदान से बाहर है। इस बार चुनावी पिच पर बेटा वीरेंद्र को उतारा है। यही वजह है कि वे हरिद्वार सीट से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
