पिथौरागढ़ में तैनात होगी एक्स्ट्रा हेलीकॉप्टर, 12 एनडीआरएफ और 40 एसडीआरएफ टीम तैनात।

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उत्तराखंड राज्य में जल्द ही मानसून दस्तक देने वाली है जिसके चलते उत्तराखंड सरकार मानसून की तैयारी में जुटी हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने उत्तराखंड राज्य में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जिसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को आपदा प्रबंधन विभाग में सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान सीएम धामी ने मानसून के दौरान किसी भी भूस्खलन की आपात स्थिति के दौरान घटना स्थल पर 15 मिनट के भीतर जेसीबी पहुंचाने के सख्त निर्देश दिए है। साथ ही राज्य का लैण्डस्लाइड मैप तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं। 

सीएम धामी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात से पहले राज्य के सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट करते हुए संबंधित सचिव विशेषरूप से हल्द्वानी से कैंचीधाम, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ रुट के पैच वर्क और राज्य के सभी पुलों की समीक्षा के लिए तत्काल निरीक्षण दौरा करे। मानसून सीजन और मेडिकल इमरजेंसी को देखते हुए पुरानी एम्बुलेंस वाहनों को तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल इमजेंसी जैसी स्थिति को देखते हुए पिथौरागढ़ में एक अतिरिक्त हैलीकॉप्टर की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिथौरागढ़ में हैलीपेड एवं एयरपोर्ट निर्माण सम्बन्धित कार्यवाही को तेजी से करने के निर्देश दिए। 

सीएम ने मानसून के दौरान जीर्ण शीर्ण विद्यालयों का चिन्हीकरण करते हुए इनमें विद्यार्थियों का पठन-पाठन बन्द करवाते हुए तत्काल प्रभाव से शेल्टर की व्यवस्था करने के निर्देश शिक्षा विभाग एवं जिलाधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अगले तीन दिनों में स्कूल, अस्पतालों, आश्रमों जैसे स्थलों संवेदनशील स्थलों का सुरक्षा की दृष्टि से वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जलाश्यों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए नियमित रूप से सिल्ट हटाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर जेैसे मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति के स्थायी समाधान एवं जल निकासी को लेकर विशेषज्ञ एंजेसी की सहायता से सर्वे करते हुए प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को बन्द सड़को की रियल टाइम जानकारी की नियमित रूप से एप एवं वेबसाइट पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। 

राज्य में आपदा के रिस्पॉन्स और पहले की गई तैयारियों के मामलों में अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए जनजागरूकता के लिए आपदा से सम्बन्धित टॉल फ्री नम्बर, सचेत एप का बेहतर प्रचार- प्रसार करने के निर्देश दिए। सीएम ने सभी विभागों को आपदा के मामलों को शीर्ष प्राथमिकता पर लेते हुए टीम भावना और बेहतर तालमेल से साथ काम करने की नसीहत दी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों की मदद के लिए स्थानीय लोगों को भी आपदा राहत और बचाव कार्यों में शामिल करने के साथ प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। सभी अस्पतालों, स्कूलों, आश्रम समेत सभी सवेदनशील जगहों पर बिजली के खुले तारों को सुरक्षित कवर करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को तत्काल मलबा हटवाने की कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं।    

आपदा के लिहाज से संवेदनशील सभी स्थानों पर जरूरत के अनुसार एसडीआरएफ और एनडीआरएफ तैनात की जाए। हेलीकॉप्टर सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी हेलीपेडों में सुरक्षा के बेहतर प्रबंध करने और हेलीपैडो का सेफ्टी ऑडिट करने को कहा। आपदाओं के दृष्टिगत पिथौरागढ़ जनपद में भी एक हेलीकॉप्टर तैनात रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में एयरपोर्ट के विस्तार के कामों और प्रक्रिया को तेज करने के साथ ही मेडिकल कॉलेज के कार्य को भी तेजी लाई जाए। ताकि आपदा के दौरान पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर उपचार मिल सके। 

मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं का डेटाबेस बनाने और ऐसी महिलाएं जिनकी डिलीवरी अगले चार माह में होनी है उसके लिए अभी से व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। नैनीताल जिले में गोला एप्रोच रोड के कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकिया की पर्याप्त मात्रा में स्थापित करने के की बात कही। प्रदेश में जीर्ण शीर्ण स्कूल के भवनों की मरम्मत करने तथा 15 दिन के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी से ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा के लिहाज से संवेदनशील ऐसे स्कूल भवन जो खतरे की जद में हैं, उनकी मरम्मत जल्द से जल्द की जाए। 

चारधाम यात्रा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से इस साल अधिक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है, ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए। अत्यधिक बारिश या भूस्खलन के चलते यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया जाए और स्थिति सामान्य होने के बाद ही यात्रियों को आगे रवाना किया जाए। प्रदेश के बांधो और जलाशय का निरीक्षण करने और इनमें जमा सिल्ट को निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है कि जलाशयों की भंडारण क्षमता कम ना हो। जलाशयों की भंडारण क्षमता कम होगी तो जिस उद्देश्य से जलाशय बनाए गए हैं उसकी पूर्ति नहीं हो पाएगी। 

उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए लोगों की भागीदारी और स्वयंसेवकों की एक संगठित टीम तैयार किया जाना चाहिए। सभी जिले इस दिशा में काम करते हुए कार्य योजना तैयार करे। सीएम ने सभी रेखीय विभागों से आगामी मानसून के दौरान आपसी समन्वयी और सामंजस स्थापित करते हुए कार्य करने को कहा। भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग करने तथा उनका डेटाबेस बनाने के निर्देश दिए ताकि प्रभावी तरीके से उनका ट्रीटमेंट किया जा सके। कैंची बाईपास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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