रामपुर तिराहा गोलीकांड को आज भी कोई भूल नहीं पाया है। इस गोलीकांड में महिलाओं की अस्मिता लूटी गई थी। देर से ही सही लेकिन उन्हें न्याय मिला है और 30 साल बाद दो आरोपियों पर दोष साबित हुआ है। दो आरोपियों सिपाही मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को दोषी साबित किया गया है। इस फैसले पर राज्य आंदोलनकारी मंच ने कोर्ट का आभार व्यक्त किया है। राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी ने कहा कि आंदोलनकारी पिछले 30 सालों से हर साल दो अक्तूबर को काला दिवस मनाते हैं। इस मामले में 30 साल बाद आए इस फैसले से उन सभी राज्य आंदोलनकारी व शहीद परिवारों को जरूर राहत मिली होगी। उन्होंने कहा कि तीस साल का इंतजार कम नहीं होता है।
