हल्द्वानी हिंसा के एक माह बाद बुधवार को पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात बनभूलपुरा के हिंसाग्रस्त क्षेत्र में पहुंचीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने बनभूलपुरा हिंसा के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। मगर उससे पहले ही इसे तोड़ दिया। प्रशासन की जल्दबाजी की वजह से हिंसा हुई। हिंसा के एक माह बाद बुधवार को पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात बनभूलपुरा के हिंसाग्रस्त क्षेत्र में पहुंचीं। मलिक का बगीचा पहुंचकर वृंदा करात ने मदरसे और नमाजस्थल के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बातचीत में वृंदा करात ने कहा कि वह इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहतीं, लेकिन घनी आबादी क्षेत्र में एक ऐसी घटना का वीडियो प्रूफ है जिसमें उन्होंने देखा कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने टारगेट कर मुस्लिमों के घरों को जलाया गया। नामजद शिकायत और सबूत होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी तो दूर पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। यह निष्पक्ष जांच नहीं है। ऐसे मामलों में दोबारा जांच कर रिहा किया जाना चाहिए। इस दौरान किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव बीजू कृष्णन, सीपीएम के राज्य सचिव राजेंद्र नेगी, सीटू के प्रदेश अध्यक्ष लेखराज, डीवाईएफआई के राज्य अध्यक्ष यूसुफ तिवारी, एसएफआई के राज्य सचिव हिमांशु चौहान, कैलाश पांडे, आरपी जोशी आदि भी मौजूद रहे। इस पर वृंदा करात ने सांत्वना देते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं मलिक के बगीचा क्षेत्र में एक महिला रेशमा रोती हुई पहुंची और बोली कि उनके पति बीमार हैं और घर पर ही रहते हैं।
