सुप्रीम कोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान और अवैध निर्माण को स्वीकृति देने के लिए उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत और पूर्व प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद को कड़ी फटकार लगाई है। पर्यावरण कार्यकर्ता और अधिवक्ता गौरव बंसल की ओर से दायर याचिका में पाखरो टाइगर सफारी में अवैध निर्माण के साथ-साथ पेड़ों की अवैध कटाई के कारण लैंसडाउन वन प्रभाग में बाघों के निवास स्थान को नष्ट करने और बाघ घनत्व में गिरावट का आरोप लगाया गया था। शीर्ष न्यायालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में समिति ने रावत और चंद को पाखरो और मोरघट्टी वन क्षेत्रों में अवैध निर्माण गतिविधियों का दोषी ठहराया। समिति ने कहा था कि जब मीडिया पाखरो और मोरघट्टी में सभी प्रकार की गड़बड़ियों की रिपोर्ट कर रहा था, तब भी तत्कालीन मुख्य वन्यजीव वार्डन और राज्य सरकार ने दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के अधीन कार्बेट के परिधीय और बफर जोन में बाघ सफारी की स्थापना की अनुमति दे दी है।
