आय से अधिक संपत्ति व मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप मंत्री गणेश जोशी पर, ऐसे हुआ खुलासा

उत्तराखंड

आय से अधिक संपत्ति के मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी घिर गए हैं। उनके देहरादून और हरिद्वार में दस से अधिक प्लाट और फैक्ट्री हैं। एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक गणेश जोशी ने विधायक और मंत्री रहते हुए सिर्फ 36 लाख का वेतन लिया। उन्होंने इस मामले की विजिलेंस और प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत की है। एडवोकेट विकेश नेगी ने विजिलेंस को आज दी गई शिकायत में कहा है कि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी 2011 में 15 लाख 60 हजार 730 रुपए, साल 2012 में 44 लाख 61 हजार 590 रुपए, साल 2015 में 13 लाख 11 हजार 350 रुपए, साल 2016 में 30 लाख 33 हजार 980 रुपए, साल 2017 में 3 लाख 40 हजार 460 रुपए, साल 2018 में 36 लाख 74 हजार 480 रुपए, साल 2019 में 51 लाख 94 हजार 720 रुपए, साल 2020 में 73 लाख 10 हजार 800 रुपए, साल 2021 में 63 लाख 72 हजार रुपए, 2022 में एक करोड़ 46 लाख 48 हजार 520 रुपए की संपत्ति अपने, अपनी पुत्री नेहा जोशी, पुत्र मयंक जोशी अपनी पत्नी निर्मला जोशी के नाम से खरीदी। इसके साथ ही विकेश नेगी ने कहा कि मंत्री गणेश जोशी ने अरुण गुप्ता और चेतना पंत के साथ मिलकर साल 2011 में 34 लाख 40 रुपए की संपत्ति बेची। जिसमें गणेश जोशी का एक तिहाई हिस्सा था। इसके बाद नेहा जोशी ने यही भूमि अपने भाई मयंक जोशी को दान कर दी। एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक ये मनी लांड्रिंग है। एडवोकेट विकेश नेगी ने खुलासा किया है कि गणेश जोशी के पुत्र मयंक जोशी ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के ओएसडी धीरेंद्र पंवार के साथ मिलकर सिडकुल की एक भूमि 45 लाख 95 हजार रुपये में पट्टे पर ली है। एडवोकेट नेगी के मुताबिक ये सब आय से बहुत अधिक है। एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक 2007 के चुनाव में गणेश जोशी ने जो हलफनामा दायर किया था। एडवोकेट विकेश नेगी के अनुसार गणेश जोशी को एक विधायक और मंत्री के तौर पर 2007 से 2023 तक कुल 36 लाख 54 हजार रुपए वेतन के तौर पर मिला। जबकि 2022 में चुनाव हलफनामे में उन्होंने नौ करोड़ रुपए की संपत्ति बतायी है।

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