अलनीनो के सक्रिय होने का समय हुआ कम, मौसम पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव दुनियाभर के लिए बना चिंता

उत्तराखंड

दुनिया के मौसम पर असर डालने वाला अलनीनो बड़ी चिंता का सबब बनने जा रहा है। अलनीनो के सक्रिय होने का समय सामान्यतया साढ़े तीन से पांच साल के बीच माना जाता है, लेकिन अब आगे यह ढाई से तीन साल में सक्रिय हो सकता है। इसके चलते तूफानों की संख्या में वृद्धि होगी और सूखे की स्थिति में वृद्धि होना भी स्वाभाविक है। इधर, शरद ऋतु सूखे की चपेट से गुजरी और शीतकालीन बर्फबारी व वर्षा भी प्रभावित रही। इस कारण वर्षा का औसत सामान्य से नीचे रहा। कई हिस्से सूखे से बाहर नहीं निकल पाए। वर्तमान में सक्रिय अलनीनो का असर छंटने के कगार पर पहुंच गया है।

जलवायु परिवर्तन पर पड़ेगा असर

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ वायुमंडलीय विज्ञानी डा. नरेंद्र सिंह के अनुसार जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर भविष्य में अलनीनो के कारण दिखेगा। वर्तमान अलनीनो पिछले मानसून के दौरान सक्रिय हुआ था और इसका असर मानसून के अंतिम चरण में भी देखने को मिला। अलनीनो एक्टिव नहीं हुआ होता तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश की मात्रा में वृद्धि होती।

इसके कारण वर्षा का औसत कम रहा तो कई हिस्से सूखे जैसी स्थिति में रहे। इसका कुप्रभाव वर्षा पर निर्भर कृषि क्षेत्र में देखने को मिला। डा. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अलनीनो पश्चिमी विक्षोभ को कमजोर करने में प्रभावशाली रहा।

जितने भी विक्षोभ उठे वे बेहद कमजोर रहे

अलनीनो के दौरान जितने भी विक्षोभ उठे वे बेहद कमजोर रहे। अब आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभों के शक्तिशाली रूप में उठने की संभावना बनी रहेगी। इसके चलते शीतकालीन वर्षा की भरपाई कुछ हद तक पूरी हो सकती है। उम्मीद है कि पश्चिमी विक्षोभ अप्रैल तक सक्रिय रहेंगे। इसके बाद शरदकाल से लानीना सक्रिय होने की संभावना रहेगी।

यह है अलनीनो

मध्य और पूर्वी प्रशांत सागर में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक होने पर अलनीनो प्रभाव बनता है। इस इफेक्ट की वजह से तापमान काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से गर्म सतह वाला पानी भूमध्य रेखा के साथ पूर्व की ओर बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में भयानक गर्मी का सामना करना पड़ता है और सूखे के हालात बनने लगते हैं।

20 साल में एक बार आता है बेहद शक्तिशाली अलनीनो

डा. नरेंद्र सिंह के अनुसार अलनीनो 20 साल में एक बार बेहद शक्तिशाली रूप धारण करता है। इस बार का अलनीनो कुछ ज्यादा ही असरकारक रहा। इसने पूर्वी व मध्य प्रशांत महासागर के सतह के तापमान को बढ़ाया। इस तापवृद्धि के कारण मौसम में बड़ा अंतर आता है। इसके विपरीत लानीना के दौरान ठंड में वृद्धि होती है। इसके चलते वर्षा की मात्रा में वृद्धि होती है। लानीना मार्च 2023 में समाप्त हुआ था।

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