पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर से राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार के फैसले की सराहना करते हुए इसका स्वागत किया है।
पूर्व सीएम ने कहा कि वस्तुतः गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी हिंदी की ही सहोदर भाषाएं हैं। मगर रंग भाषा अपने तरीके की भाषा है जिस पर तिब्बतियन भाषा उसका ज्यादा असर है और यह भाषा पिथौरागढ़, धारचूला के सीमांत में बोली जाती है और बहुत समृद्ध भाषा है।
हरीश रावत ने आगे कहा कि मोदी जी ने जिस स्थान पर पार्वती कुंड में तपस्या की थी और जिन भाई-बहनों से वहां भेंट की थी, उनकी भाषा भी रंग भाषा ही है तो रंग भाषा को भी इस फिल्म प्रोत्साहन की नीति में सम्मिलित होना चाहिए।
