सीएम की मॉनिटरिंग के बावजूद भी बजट खर्च करने में फिसड्डी साबित, देहरादून से विकास क्यों नहीं चढ़ पाता है पहाड़

उत्तराखंड

राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2024-25 के आम बजट की तैयारी में जुट चुकी है। जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट को खर्च करने में ज्यादातर विभाग फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, विभाग इतनी सुस्त चाल से चल रहे हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लिए आबंटित बजट भी खर्च नहीं कर पा रहे हैं। विभागों का यह रवैया तब है जब सीएम धामी ने वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही खर्च की मॉनिटरिंग शुरू कर दी थी।

विभागों के बजट में होगी कटौती

विभागों के बजट खर्च न करने से राज्य के विकास को पलीता लग सकता है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आगामी वित्तीय वर्ष 2024 -25 के आम बजट में उन विभागों के बजट में कटौती होगी, जो विभाग खर्च करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। यह बात वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कही है। वित्त मंत्री ने हिदायत दी है कि जो विभाग चालू वित्तीय वर्ष में सही तरीके से बजट खर्च नहीं कर पाए हैं, उनको आगामी उसी हिसाब से बजट दिया जाएगा जो प्रगति उनकी वर्तमान वित्तीय वर्ष में नजर आ रही है। उधर सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुंदरम में कहा है कि यह परंपरा पहले से चली आ रही है कि, जो विभाग खर्च करने में पीछे रहते है। उनको आगामी वित्तीय वर्ष में भी उसी हिसाब से बजट दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि विभागों को ऐसी कौन सी बूस्टर डोज दी जाए कि वह बजट को शत प्रतिशत खर्च करे।

विभागों के खर्च का ब्योरा

ग्रामीण विकास में 1965 करोड़ का पास हुआ था, जिसमें विभाग के द्वारा खर्च किया 676।

पीडब्ल्यूडी विभाग का 1681 करोड़ का बजट पास हुआ था, जिसमे खर्च किया 775 करोड़।

ऊर्जा विभाग का 1194 करोड़ का बजट पास हुआ था, खर्च कर पाया 262 करोड़ रुपये।

शहरी विकास का 1116 करोड़ का बजट पास हुआ था, खर्च किया केवल 242 करोड़ रुपये।

आपदा प्रबंधन विभाग का बजट पास हुआ था 1082 करोड़, जबकि खर्च हुआ 70 करोड़ रुपये।

सिंचाई विभाग में पास हुआ 736 करोड़ का बजट, खर्च 116 करोड़।

उद्यान विभाग 236 करोड़ में से 6 करोड़ खर्च कर पाया।

समाज कल्याण विभाग में 167 करोड़ में से 13 करोड़ रुपये खर्च हुआ है।

पर्यटन 165 करोड़ में से केवल 72 करोड़ रुपये खर्च हुआ है।

गृह 104 करोड़ के बजट में 67 करोड़ खर्च किया।

उच्च शिक्षा के 95 करोड़ के बजट में 41 करोड़ खर्च हुआ।

वन विभाग 80 करोड़ के बजट में 21 करोड़ खर्च हुआ।

मुख्यमंत्री घोषणाओं के लिए 65 करोड़ के बजट में 28 करोड़ खर्च हुए।

कृषि 63 करोड़ में से 35 करोड़ खर्च हुए।

खेल 55 करोड़ के बजट में 24 करोड़ खर्च हुआ।

स्वास्थ्य में 44 करोड़ के बजट में 20 करोड़ खर्च हुआ।

युवा कल्याण के 23 करोड़ के बजट में 8 करोड़ खर्च हुआ ।

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