उत्तराखंड देवों की भूमि है और यही वजह हैं कि यहां चारों धाम हैं जहां लाखों लोग हर साल दर्शन करने आते हैं। लेकिन इसके अलावा एक और धाम है जहां भविश्य में भगवान विष्णु की भव्य पूजा अर्चना होगी। क्या आप जानते हैं वो कौन सा धाम है। अगर नहीं तो हम आपको आज बताते हैं कहानी एक ऐसे धाम की जिाका जिक्र सदियों पहले ही हमारे पुराणों में बताया जा चुका है। इस मंदिर के बारे में कहावत है कि जब भगवान नरसिंह की बाल बराबर कलाई टूट जाएगी तो नर नारायण पर्वत मिल जाएंगे और बद्रीनाथ धाम हमेशा के लिए बंद हो जाएगा । उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा भविश्य बद्री में होगी। कहते हैं कि जब शंकरार्चा ने पंच बद्री की स्थापना की थी तो इसमें भविष्य बद्री भी थे और जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे वैसे एक शिला पर भगवान विश्णु और अन्य देवा देवताओं की मूर्ति आकार लेने लगी हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए जोशीमठ से होते हुए तपोवन पहुंचकर यहां से ठीक 13 किलोमीटीर की दूारी पर स्थित है भगवान पवित्र धाम। चारों ओर उंची पहाडियां और सामने हिमालय की मलहटी में बसा है भविष्य बद्री। इससे पहले एक गांव है सुभाई जहां शंकराचार्य द्वारा स्थापित भगवान विश्णु का मंदिर बन रहा है । यहां पूजा करने के बाद श्रद्वाुलु भविष्य बद्री की ओर प्रस्थान करेंगे। थोडा आगे चढने पर अब हम पुहंच जाते हैं अपने गंतव्य पर। इस मंिदर तक गाडी जाती है। और यहां पर उतरकर हल्की सी चढाई पडती है जहां कुछ दुकानें निर्मित हैं यहां हम भगवान के लिए प्रसाद ले सकते हैं । फिर यहां से हल्की से कच्चे रास्तों से होकर ठीक सामने दर्शन होते हैं भगवान बद्री विषाल के।
ऐसी मान्यता है कि शंकराचार्य जी ने जब पंच बद्री की स्थापना की थी तब इसमें भविष्य बद्री भी शामिल थे इसके साथ ही यह भी माना जाता है कि जब भगवान नरसिंह की कलाई टूट जाएगी तो न और नारायण पर्वत एक हो जाएंगे इसके बाद मौजूदा बद्रीनाथ हमेशा के लिए बंद हो जाएगा और भविष्य में भगवान बद्रीनाथ के दर्शन इसी मंदिर में होंगे।
